बुखार (Fever)




बुखार (Fever)


बुखार आना एक बेहद आम बीमारी होती है। विज्ञान के अनुसार यह बुखार रोग नहीं बल्कि रोग का लक्षण होता है। जानिएं बुखार के बारें में विस्तार से:

 

बुखार (About Fever in Hindi) 

मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 37°सेल्सियस या 98.6° फैरेनहाइट होता है। जब शरीर का तापमान इस से ऊपर हो जाता है तो यह स्थिति बुखार कहलाती है।

बुखार अपने आप में कोई रोग नहीं है बल्कि यह सम्भवतः किसी रोग का लक्षण है। बुखार (Bukhar) वास्तव में शरीर में किसी संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया है। बुखार का स्तर संक्रमण की गंभीरता के बारे में बताता है।

बुखार के कारण (Fever Causes)

बुखार के कारण कई हो सकते है:

  • श्वसन संस्थान वाले बुखार जैसे की जुकाम, फ्लू, गले की सूजन, श्वासनली शोथ, न्यूमोनिया, टी.बी. आदि।
  • त्वचा के संक्रमण (Infection) से होने वाले बुखार जैसे की जख्म में पीप होना, फोड़े या दाने वाले बुखार।
  • मच्छर या पिस्सू से होने वाले बुखार जैसे की मलेरिया (Malaria Fever), फायलेरिया (Flaria), डेंगू (Dengue), चिकुनगुन्या (Chickengunia), मस्तिष्क ज्वर (Meningitis), प्लेग (Plague), आदि। इन सभी बुखारों में पहले कंपकंपी होती है।
  • पाचन संस्थान के बुखार जैसे दस्त या पेचिश, पीलीया, टायफॉईड आदि। पेचिश में खून और बलगम गिरता है। टायफाईड खून के जॉंच से ही पता चलता है।
  • प्रजनन और मूत्र संस्थान के बुखार – इसमें पेशाब के समय जलन होती है।
  • अन्य संक्रामक बुखार जैसे की ब्रुसेलॉसीस, एड्स, तपेदिक के कुछ प्रकार, जोड़ों का बुखार। असंक्रामक बुखारों में जैसे लू लगना और ऍलर्जी से होने वाले बुखार।

    सामान्य उपचार

    बुखार आने पर रोगी के शरीर का तापमान देखना चाहिए और अगर तापमान अधिक हो तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बुखार (Bukhar) आने के दौरान रोगी को निम्न सामान्य उपचार भी दिया जा सकता है:

     

    सामान्य उपचार (Treatment of Fever) 

    • रोगी को खूब सारा स्वच्छ एवं उबला हुआ पानी पिलाएं, शरीर को पर्याप्त कैलोरी देने के लिए ग्लूकोज, फलों का रस आदि दें।
    • आसानी से पचने वाला खाना जैसे चावल की कांजी, साबूदाने की खीर या खिचड़ी, जौ का पानी आदि देना चाहिये।
    • रोगी को अच्छे हवादार कमरे में रखना चाहिये।
    • स्वच्छ एवं मुलायम वस्त्र पहनाएं।
    • यदि ज्वर 39.5 डिग्री से. या 103.0 फैरेनहाइट से अधिक हो या फिर 48 घंटों से अधिक समय हो गया हो तो डॉक्टर से परामर्श लें।




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