खून की कमी (Anemia)




खून की कमी (Anemia)


एनीमिया क्या है (About Anemia in Hindi)

खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाने को एनीमिया अर्थात रक्ताल्पता का रोग कहा जाता है। आयरन हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। ये कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं। इसलिए आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है क्योंकि हीमोग्लोबिन ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाता है।

बीमारियों का कारण 

एनीमिया (Anemia) कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह कई बीमारियों की वजह जरूर बन सकता है। जीवनशैली के साथ आहार संबंधी आदतों में होने वाला बदलाव इस समस्या के मुख्य कारण के रूप में सामने आ रहा है।  बढ़ते बच्चों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं व बीमार व्यक्तियों में एनीमिया का खतरा ज्यादा होता है। विश्व की लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं, और हमारे देश की लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।

हीमोग्लोबिन का स्तर (Normal Range for Hemoglobin)

स्वस्थ पुरूष के शरीर में 13-16 व महिला में 12-14 मिलिग्राम प्रति डेसिलीटर हीमोग्लोबिन होना चाहिए।

खून की कमी के लक्षण

खून की कमी के कारण (Anemia Causes)

एनीमिया का सबसे प्रमुख कारण पौष्टिक खाने की कमी को ही माना जाता है। इसके अलावा कुछ बीमारियों के कारण भी शरीर में खून की कमी हो जाती है। निम्न कुछ ऐसी ही परिस्थितियां हैं जिनमें एनीमिया हो सकती है: ​​

  • किडनी कैंसर: किडनी से इरायथ्रोपोयॅटीन (Erythropoietin) नाम के हारमोन का उत्पादन होता है जो अस्थिमज्जा (Bone Marrow) को रेड-ब्लड सेल के निर्माण में मदद करता है, जिन लोगों को किडनी का कैंसर होता है उनके शरीर मेँ इरायथ्रोपोयॅटीन (Erythropoieti) हारमोन का निर्माण नहीं होता है और इसकी वजह से रेड-ब्लड सेल्स का बनना भी कम हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को एनीमिया हो जाता है ।
  • अल्पाहार या कुपोषण: रेड-ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए कई प्रकार के विटामिन व मिनरल्स की जरूरत होती है, इनकी कमी से रेड- ब्लड सेल्स का निर्माण भी कम हो जाता है और फलस्वरूप हीमोग्लोबिन भी कम बनता है और अंततः व्यक्ति एनीमिया का शिकार बन सकता है। कुपोषण महिलाओं में आम समस्या है और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या के कारण एनीमिया की परेशानी हो सकती है।
  • हीमोग्लोबिन के जीन में बदलाव: इस प्रकार के एनीमिया को सीकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia) कहते हैं । असामान्य हीमोग्लोबिन के कारण रेड ब्लड सेल्स सीकल यानी हंसिये के आकार के हो जाते हैं, सीकल सेल एनीमिया के कई प्रकार होते हैं जिनका असर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग तरीके से होता है।
  • थैलैसीमीया: थैलैसीमीया आनुवांशिक एनीमिया होता है,इस प्रकार के एनीमिया में हीमोग्लोबिन अपेक्षित मात्रा में बनने के बजाय कम या ज्यादा बनने लगता है।
  • वायरल इंफेक्शन, केमोथेरपी: वायरल इंफेक्शन, केमोथेरपी और कुछ दवाएं लेने से भी अस्थिमज्जा (Bone Marrow ) बुरी तरह से प्रभावित होती है इससे ब्लड सेल्स का निर्माण बिल्कुल कम हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप एनीमिया होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, इस प्रकार के एनीमिया को अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia) कहते हैं।
  • हीमोलायटिक एनीमिया (Hemolytic Anaemia): सामान्य रेड-ब्लड सेल्स का आकार इसके ठीक से काम करने के लिए काफी अहम होता है , कई कारणों से रेड-ब्लड सेल नष्ट हो जाते हैं जिस अवस्था को हीमोलायटिीस कहते हैं, ऐसी स्थिति में रेड-ब्लड सेल्स ठीक तरीके से काम नहीं कर पाते हैं, हीमोलायटिस की स्थिति कई कारणों से पैदा हो सकती हैं, कारण आनुवांशिक और रेड-ब्लड सेल्स का अति निर्माण हो सकता है इसके अलावा कई अवस्था में सामान्य रेड-ब्लड सेल्स में भी हीमोलायटिक एनीमिया हो सकता है।
  • विटामीन बी-12 की कमी: शरीर में विटामीन बी-12 की कमी से परनीसीयस एनीमिया होने की संभावना होती है। परनीसीयस एनीमिया ज़्यादातर शुद्ध शाकाहारी व्यक्तियों को और लंबे व़क्त से शराब का सेवन करने वालों को होता है।
  • रक्तस्राव से होने वाला एनीमिया: माहवारी के दिनों में अत्यधिक स्राव, किसी चोट या घाव से स्राव, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल अल्सर, कोलन कैंसर इत्यादि में धीरे-धीरे ख़ून लगातार रिसने से एनीमिया हो सकता है।
  • लंबे समय से बीमार होने पर: किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक बीमारी से एनीमिया हो सकता है।

 

एनीमिया के कुछ अन्य कारण निम्न हैं: 

  • दवाओं का दुष्प्रभाव
  • थायरॉयड की समस्या
  • कैंसर
  • लीवर की बीमारियां
  • वंशानुगत समस्याएं
  • एड्स
  • टीबी (Tuberculosis)
  • किडनी / गुर्दे की अनियमितता की समस्या
  • किडनी/ गुर्दे फेल हो जाने के कारण (Acute Renal Failure Or Chronic Renal Failure)
  • नियमित रक्तस्राव व अन्य दूसरे कई कारण भी एनीमिया के कारणों में उभर कर सामने आ सकते हैं

सामान्य उपचार

एनीमिया से बचाव का सबसे बेहतरीन उपाय है पौष्टिक आहार लेना। इसके साथ ही निम्न बिंदूओं पर ध्यान देकर भी इस बीमारी से बचा जा सकता है:

एनीमिया से बचाव (Treatment of Anemia)

  • एनीमिया ज्यादातर पौष्टिक आहार लेने से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ प्रकार के एनीमिया में अलग-अलग तरह से उपचार कराने पड़ते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है डॉक्टरी परामर्श।
  • साधारण तौर पर युवाओं में एनीमिया का उपचार बहुत आसानी से हो जाता है, जबकि वयस्क में एनीमिया की शिकायत जल्दी से दूर नहीं हो पाती है।
  • खून की कमी दूर करने के लिए सबसे पहले खाने में हरी सब्जियां (पालक, मेथी), फल व सलाद की मात्रा बढ़ानी चाहिए।
  • चुकंदर आयरन का अच्छा स्त्रोत है। इसको रोज खाने में सलाद या सब्जी के तौर पर शामिल करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती।
  • हरी पत्तेदार सब्जी जैसे पालक, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं। इनके सेवन से वजन कम होने के साथ खून भी बढ़ता है और पेट भी ठीक रहता है।
  • सूखे मेवे जैसे खजूर, बादाम और किशमिश का खूब प्रयोग करना चाहिए। इसमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है।
  • फल जैसे खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, किशमिश और अनार खाने से खून बढ़ता है। अनार खाना एनीमिया (Fruits in Anemia) में काफी फायदा करता है।
  • आयरन की गोलियां या आयरन सुक्रोच के इंजेक्शन, विटामिन बी-12 की गोली या इंजेक्शन डॉक्टरी सलाह से लें।




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